नात लिरिक्स

Ata-e-Mustafa ! Mere Khwaja Piya ! Hasan Husain Se Hai Aap Ko Nisbat

अता-ए-मुस्तफ़ा ! मेरे ख़्वाजा पिया ! हसन हुसैन से है आप को निस्बत

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी और हाफ़िज़ अहसन क़ादरीशायर: मुहम्मद 'आसिम-उल-क़ादरी मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

'अता-ए-मुस्तफ़ा ! मेरे ख़्वाजा पिया !हसन, हुसैन से है आप को निस्बतनबी की आल हो, 'अली के लाल होबयाँ हो किस ज़बाँ से आप की अज़मत

मुस्तफ़ा ने तुम्हें हिन्द भेजा, तुम मुरादे नबी होहिन्द जिस से मुनव्वर हुआ है, आप वो रौशनी होरिज़ा-ए-मुस्तफ़ा ! हबीब-ए-किब्रिया !ज़मीं क्या, है फ़लक पर आप की शोहरत

'अता-ए-मुस्तफ़ा ! मेरे ख़्वाजा पिया !हसन, हुसैन से है आप को निस्बतनबी की आल हो, 'अली के लाल होबयाँ हो किस ज़बाँ से आप की अज़मत

एक मुद्दत से दिल में है अरमाँ, मैं भी अजमेर जाऊँथाम कर तुमरे रौज़े की जाली, हाल दिल का सुनाऊँदिल-ए-बेताब की, सदा सुन लो, सख़ी !दिखा दीजे मुझे भी वो हसीं तुर्बत

'अता-ए-मुस्तफ़ा ! मेरे ख़्वाजा पिया !हसन, हुसैन से है आप को निस्बतनबी की आल हो, 'अली के लाल होबयाँ हो किस ज़बाँ से आप की अज़मत

एक कासे में दरिया डुबोया, डूबतों को तिरायाजोगी जयपाल को तुम ने, ख़्वाजा ! है मुसलमाँ बनायाख़ुदा की शान हो, नबी की जान होज़माना जानता है आप की रिफ़'अत

'अता-ए-मुस्तफ़ा ! मेरे ख़्वाजा पिया !हसन, हुसैन से है आप को निस्बतनबी की आल हो, 'अली के लाल होबयाँ हो किस ज़बाँ से आप की अज़मत

आप को अपना सरदार माना हिन्द के औलिया नेमेरे साबिर ने, वारिस पिया ने और अहमद रज़ा नेतुम्ही हिन्दल-वली, न तुम सा है कोईलब-ए-सरकार पर है आप की मिदहत

'अता-ए-मुस्तफ़ा ! मेरे ख़्वाजा पिया !हसन, हुसैन से है आप को निस्बतनबी की आल हो, 'अली के लाल होबयाँ हो किस ज़बाँ से आप की अज़मत

तुम ने ता'लीम तौहीद की दी, शिर्क से है बचायाबुत-परस्ती में जो मुब्तला थे, उन को कलमा पढ़ायासदा इस्लाम की, ए 'आसिम ! गूँज उठीहुई काफ़ूर कुफ़्र-ओ-शिर्क की बिद'अत

'अता-ए-मुस्तफ़ा ! मेरे ख़्वाजा पिया !हसन, हुसैन से है आप को निस्बतनबी की आल हो, 'अली के लाल होबयाँ हो किस ज़बाँ से आप की अज़मत

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