नात लिरिक्स

Aye Wajh-e-Takhleeq-e-Kainat | Tere Sadqe Jaan-e-Jaanan

ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात | तेरे सदक़े जान-ए-जानाँ

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात !तेरे सदक़े, जान-ए-जानाँ !तेरे क़ुर्बां, जान-ए-जानाँ !

ज़मीन-ओ-ज़माँ तुम्हारे लिएमकीन-ओ-मकाँ तुम्हारे लिएचुनीन-ओ-चुनाँ तुम्हारे लिएबने दो जहाँ तुम्हारे लिए

ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात !तेरे सदक़े, जान-ए-जानाँ !तेरे क़ुर्बां, जान-ए-जानाँ !

दहन में ज़बाँ तुम्हारे लिएबदन में है जाँ तुम्हारे लिएहम आए यहाँ तुम्हारे लिएउठे भी वहाँ तुम्हारे लिए

ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात !तेरे सदक़े, जान-ए-जानाँ !तेरे क़ुर्बां, जान-ए-जानाँ !

इसालत-ए-कुल, इमामत-ए-कुलसियादत-ए-कुल, इमारत-ए-कुलहुकूमत-ए-कुल, विलायत-ए-कुलख़ुदा के यहाँ तुम्हारे लिए

ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात !तेरे सदक़े, जान-ए-जानाँ !तेरे क़ुर्बां, जान-ए-जानाँ !

तुम्हारी चमक, तुम्हारी दमकतुम्हारी झलक, तुम्हारी महकज़मीन-ओ-फ़लक, सिमाक-ओ-समकमें सिक्का निशाँ तुम्हारे लिए

ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात !तेरे सदक़े, जान-ए-जानाँ !तेरे क़ुर्बां, जान-ए-जानाँ !

जिनाँ में चमन, चमन में समनसमन में फबन, फबन में दुल्हनसज़ा-ए-मिहन पे ऐसे मिननये अम्न-ओ-अमाँ तुम्हारे लिए

ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात !तेरे सदक़े, जान-ए-जानाँ !तेरे क़ुर्बां, जान-ए-जानाँ !

न रूह-ए-अमीं, न 'अर्श-ए-बरींन लौह-ए-मुबीं, कोई भी कहींख़बर ही नहीं जो रम्ज़ें खुलींअज़ल की निहाँ तुम्हारे लिए

ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात !तेरे सदक़े, जान-ए-जानाँ !तेरे क़ुर्बां, जान-ए-जानाँ !

ये तूर कुजा सिपह्र तो क्याकि 'अर्श-ए-'उला भी दूर रहाजिहत से वरा विसाल मिलाये रिफ़'अत-ए-शाँ तुम्हारे लिए

ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात !तेरे सदक़े, जान-ए-जानाँ !तेरे क़ुर्बां, जान-ए-जानाँ !

ये शम्स-ओ-क़मर, ये शाम-ओ-सहरये बर्ग-ओ-शजर, ये बाग़-ओ-समरये तेग़-ओ-सिपर, ये ताज-ओ-कमरये हुक्म-ए-रवाँ तुम्हारे लिए

ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात !तेरे सदक़े, जान-ए-जानाँ !तेरे क़ुर्बां, जान-ए-जानाँ !

इशारे से चाँद चीर दियाछुपे हुए ख़ुर को फेर लियागए हुए दिन को 'अस्र कियाये ताब-ओ-तवाँ तुम्हारे लिए

ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात !तेरे सदक़े, जान-ए-जानाँ !तेरे क़ुर्बां, जान-ए-जानाँ !

सबा वो चले कि बाग़ फलेवो फूल खिले कि दिन हों भलेलिवा के तले सना में खुलेरज़ा की ज़बाँ तुम्हारे लिए

ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात !तेरे सदक़े, जान-ए-जानाँ !तेरे क़ुर्बां, जान-ए-जानाँ !

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