नात लिरिक्स

Aye Madine Ke Tajdar Tujhe Ahl-e-Imaan Salam Kehte Hain

ऐ मदीने के ताजदार तुझे अहल-ए-ईमाँ सलाम कहते हैं

नात ख़्वान: अब्दुर्रउफ़ रूफ़ीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ मदीने के ताजदार ! तुझेअहल-ए-ईमाँ सलाम कहते हैंतेरे 'उश्शाक़, तेरे दीवानेजान-ए-जानाँ ! सलाम कहते हैं

जो मदीने से दूर रहते हैंहिज्र-ओ-फ़ुर्क़त का रंज सहते हैंवो तलबगार-ए-दीद रो रो करऐ मेरी जाँ ! सलाम कहते हैं

जिन को दुनिया के ग़म सताते हैंठोकरें दर-ब-दर की खाते हैंग़म-नसीबों के चारा-गर ! तुम कोवो परेशाँ सलाम कहते हैं

दूर दुनिया के रंज-ओ-ग़म कर दोऔर सीने में अपना ग़म भर दोउन को चश्मान-ए-तर 'अता कर दोजो भी, सुल्ताँ ! सलाम कहते हैं

जो तेरे 'इश्क़ में तड़पते हैंहाज़री के लिए तरसते हैंइज़्न-ए-तयबा की आस में, आक़ा !वो पुर-अरमाँ सलाम कहते हैं

तेरे रौज़े की जालियों के पासआक़ा ! रहम-ओ-करम की ले कर आसकितने दुखियारे रोज़ आ आ केशाह-ए-ज़ीशाँ ! सलाम कहते हैं

आरज़ू-ए-हरम है सीने मेंअब तो बुलवाइए मदीने मेंतुझ से तुझ ही को माँगते हैं जोवो मुसलमाँ सलाम कहते हैं

रुख़ से पर्दे को अब उठा दीजेअपने क़दमों से अब लगा लीजेआह ! जो नेकियों से हैं यकसरख़ाली दामाँ सलाम कहते हैं

आप 'अत्तार ! क्यूँ परेशाँ हैं ?बद से बद-तर भी ज़ेर-ए-दामाँ हैंउन पे रहमत वो ख़ास करते हैंजो मुसलमाँ सलाम कहते हैं

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