नात लिरिक्स

Aye Saba Mustafa Se Keh Dena Gham Ke Mare Salam Kehte Hain (All Versions)

ऐ सबा मुस्तफ़ा से कह देना ग़म के मारे सलाम कहते हैं

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ सबा ! मुस्तफ़ा से जा कहना, ग़म के मारे सलाम कहते हैंसब्ज़-गुंबद की उन बहारों को दिल हमारे सलाम कहते हैं

ऐ सबा ! मुस्तफ़ा से कह देना, ग़म के मारे सलाम कहते हैंयाद करते हैं तुम को शाम-ओ-सहर, दिल हमारे सलाम कहते हैं

अल्लाह अल्लाह ! हुज़ूर की बातें, मरहबा ! रंग-ओ-नूर की बातेंचाँद जिन पर निसार होता है और सितारे सलाम कहते हैं

अल्लाह अल्लाह ! हुज़ूर के गेसू, भीनी भीनी महकती वो ख़ुश्बूजिस से मा'मूर है फ़ज़ा हर-सू, वो नज़ारे सलाम कहते हैं

जब मुहम्मद का नाम आता है, रहमतों का पयाम आता हैलब हमारे दुरूद पढ़ते हैं, दिल हमारे सलाम कहते हैं

सब्ज़-गुंबद का आँख में मंज़र और तसव्वुर में आप का मिम्बरसामने जालियाँ हैं रौज़े की, दिल हमारे सलाम कहते हैं

ज़ाइर-ए-तयबा तू मदीने में प्यारे आक़ा से इतना कह देनाआप की गर्द-ए-राह को, आक़ा ! चाँद-तारे सलाम कहते हैं

ज़िक्र था आख़री महीने का, तज़्किरा छिड़ गया मदीने काहाजियो ! मुस्तफ़ा से कह देना, बे-सहारे सलाम कहते हैं

ऐ ख़ुदा के हबीब ! प्यारे रसूल ! ये हमारा सलाम कीजे क़ुबूलआज महफ़िल में जितने हाज़िर हैं, मिल के सारे सलाम कहते हैं

ग़म के बादल तमाम छटने लगे, पर्दे आँखों से सारे हटने लगेजो तलातुम बने हुए थे, सुहैल ! वो किनारे सलाम कहते हैं

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।