नात लिरिक्स

Ab Asbab Pa Jaen Hum Jaan-e-Aalam

अब असबाब पा जाएँ हम जान-ए-आलम

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अब असबाब पा जाएँ हम, जान-ए-'आलम !पहुँच जाएँ तेरे हरम, जान-ए-'आलम !

मदीने को देखे हुआ एक 'अर्सामुझे काट खाए ये ग़म, जान-ए-'आलम !

तेरे दर पे इफ़्तारियाँ फिर मैं पाऊँदिखा दे फिर अपना हरम, जान-ए-'आलम !

मेरा नफ़्स-ए-सरकश शब-ओ-रोज़ मुझ परबहुत ढा रहा है सितम, जान-ए-'आलम !

गुनाहों ने हाए मुझे मार डालाकरम, जान-ए-'आलम ! करम, जान-ए-'आलम !

गुनाहों की आतश मेरी कब बुझेगीतू बरसा दे अब्र-ए-करम, जान-ए-'आलम !

करम न करोगे, ख़बर गर न लोगेकिधर जाएँगे आह हम, जान-ए-'आलम !

तू रख दे मेरे सर पे दस्त-ए-तसल्लीमिटा दे मेरे ग़म-अलम, जान-ए-'आलम !

सुनाऊँ किसे ? कौन मेरी सुनेगा ?मेरी दास्तान-ए-अलम, जान-ए-'आलम !

जिसे सुन के सीने से अपने लगा लोकरूँ ना'त ऐसी रक़म, जान-ए-'आलम !

'उबैद-ए-रज़ा का भी दोनों जहाँ मेंतू रख ले ख़ुदा-रा भरम, जान-ए-'आलम !

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