नात लिरिक्स

Aaqa Aaqa Bol Bande Aaqa Aaqa Bol

आक़ा आक़ा बोल बंदे आक़ा आक़ा बोल

नात ख़्वान: मुहम्मद राशिद आज़मशायर: मुहम्मद राशिद आज़मउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आक़ा आक़ा बोल, बंदे ! आक़ा आक़ा बोलज़िक्र-ए-नबी तू करता जा, ये ज़िक्र बड़ा अनमोल

ऐसा दिन भी आ जाए सरकार के दर पे बैठे होंलब ख़ामोश ज़बाँ बन जाएँ आँसू 'अर्ज़ा करते होंउन के दर पर रोने वाले ! दिल से कुछ तो बोलआक़ा आक़ा बोल, बंदे ! आक़ा आक़ा बोल

सरकार-ए-दो-'आलम प्यार-ए-आक़ा जिधर से गुज़रा करते थेशजर गवाही देता था और पत्थर कलमा पढ़ते थेनूर-ए-ख़ुदा के मुन्किर अब तो अपनी आँखें खोलआक़ा आक़ा बोल, बंदे ! आक़ा आक़ा बोल

आओ चलो, दीवानो ! सारे शहर-ए-मदीना चलते हैंमेरी क्या औक़ात है, सब ही उन के दर से पलते हैंग़ैरों को भी देते हैं वो बिन माँगे बिन मोलआक़ा आक़ा बोल, बंदे ! आक़ा आक़ा बोल

जब से होश सँभाला है, मैं उन की ना'तें पढ़ता हूँगुस्ताख़ी न हो जाए, मैं सँभल सँभल के चलता हूँमाँ की दु'आओं का सदक़ा है ऐसा मिला माहौलआक़ा आक़ा बोल, बंदे ! आक़ा आक़ा बोल

राशिद ! नातें लिखना पढ़ना ये है बढ़ा ए'ज़ाज़उन के करम के सदक़े ही से ऊँची है परवाज़ना'त-ए-नबी तू सुनाए जा और कानों में रस गोलआक़ा आक़ा बोल, बंदे ! आक़ा आक़ा बोल

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