उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zulmat-kushi ka qasd kiya aur chal paDe

ज़ुल्मत-कुशी का क़स्द किया और चल पड़े

ظلمت کشی کا قصد کیا اور چل پڑے

शायर: Ehtisham ul Haq Siddiqui5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़ुल्मत-कुशी का क़स्द किया और चल पड़े
मुट्ठी में जुगनुओं को लिया और चल पड़े

आती रहेगी मौत को आना जहाँ पे है
हम ने तो अपना ज़हर पिया और चल पड़े

सहरा से शहर आने में और एहतिमाम क्या
दामन का अपने चाक सिया और चल पड़े

हम से बदन-बदोशों का रख़्त-ए-सफ़र कहाँ
बस अपना ख़ाक-दान लिया और चल पड़े

उजलत थी हम को चाँद का क्या करते इंतिज़ार
आँखों को शब चराग़ किया और चल पड़े