उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apne shab-yaron se kis tarah main ghafil ho jaun

अपने शब-यारों से किस तरह मैं ग़ाफ़िल हो जाऊँ

اپنے شب یاروں سے کس طرح میں غافل ہو جاؤں

शायर: Ehtisham ul Haq Siddiqui5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपने शब-यारों से किस तरह मैं ग़ाफ़िल हो जाऊँ
आसमाँ जाग रहा है तो मैं कैसे सो जाऊँ

दिल-ब-दर मैं भी हूँ और तू भी है मा'ज़ूल-नज़र
तू इजाज़त दे अगर मुझ को मैं तेरा हो जाऊँ

वक़्त ने इतने बदलवाए हैं चेहरे मुझ से
ख़ौफ़ है भीड़ में इन की न किसी दिन खो जाऊँ

जहल की बाँझ ज़मीनों में न अग पाऊँगा
इल्म-परवर हो ज़मीं कोई तो ख़ुद को बो जाऊँ

अब्र-ए-ग़म दिल का बरस जाए तो इस पानी से
दाग़ धब्बे हैं जो आँखों में उन्हें भी धो जाऊँ