उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo asl hai meri wahi poshak pahan lun

जो अस्ल है मेरी वही पोशाक पहन लूँ

جو اصل ہے میری وہی پوشاک پہن لوں

शायर: Ehtisham ul Haq Siddiqui5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो अस्ल है मेरी वही पोशाक पहन लूँ
सब खेल हुए ख़त्म चलूँ ख़ाक पहन लूँ

हो जाऊँगा उस मंज़र-ए-गुलशन में कहीं ज़म
गुल-रंग कोई कुर्ता-ए-सद-चाक पहन लूँ

ग़मनाकों में हँसता हुआ अच्छा न लगूँगा
ठहरो मैं कोई चेहरा-ए-ग़मनाक पहन लूँ

इस नर्म-बयानी को मिरी कौन सुनेगा
आवाज़ पे इक लहजा-ए-सफ़्फ़ाक पहन लूँ

जाना है दर-ए-अक़्ल पे दीवानगी छोड़ूँ
कुछ देर को फिर ख़िर्क़ा-ए-इदराक पहन लूँ