उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek baja hai raat ka ab to sone do

एक बजा है रात का अब तो सोने दो

ایک بجا ہے رات کا اب تو سونے دو

शायर: Ehtisham ul Haq Siddiqui5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक बजा है रात का अब तो सोने दो
मोबाइल भी गर्म है ठंडा होने दो

आज तो प्यासे सब्र के घर में यकजा हैं
दरियाओं को आज अकेला रोने दो

सोच लो दिल को बाहर छोड़ के आए तो
हम दो में से रह जाएँगे पौने दो

आँधी ने जो भर दी है इन आँखों में
जाने किस की गर्द है आँखें धोने दो

इस सोफा पर लेट के मैं सो जाऊँगा
उन के ख़्वाब को बिस्तर पर ही सोने दो