उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi to qaid hai aur parda-e-mahfil mein hai

ज़िंदगी तो क़ैद है और पर्दा-ए-महफ़िल में है

زندگی تو قید ہے اور پردۂ محفل میں ہے

शायर: Ehsan Jafri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी तो क़ैद है और पर्दा-ए-महफ़िल में है
आरज़ू हुस्न-ए-ज़मीं की गोशा-ए-ग़ाफ़िल में है

ढूँढता है तू जिसे वो जुस्तुजू मेरी भी है
मक़्सद-ए-अहल-ए-नज़र तो एक ही मंज़िल में है

बंदिश-ए-कौन-ओ-मकाँ परवाज़ में हाइल नहीं
हासिल-ए-जहद-ओ-अमल तो जज़्बा-ए-कामिल में है

ज़ुल्म की तारीकियों को जुम्बिश-ए-लब सैल-ए-नूर
बोल कि है वक़्त तेरा जो भी तेरे दिल में है

जाँ-फ़िशानी ओस की और मिट्टी की तलब
क्या बुझेगी प्यास लेकिन कुछ नमी तो दिल में है