उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham-KHwar hain jo un ka chalan dekh raha hun

ग़म-ख़्वार हैं जो उन का चलन देख रहा हूँ

غم خوار ہیں جو ان کا چلن دیکھ رہا ہوں

शायर: Ehsan Jafri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म-ख़्वार हैं जो उन का चलन देख रहा हूँ
बेचैनी-ए-अर्बाब-ए-वतन देख रहा हूँ

बिगड़ा हुआ दुनिया का चलन देख रहा हूँ
लिपटा हुआ शो'लों में वतन देख रहा हूँ

किस फ़लसफ़ा-ए-ज़ीस्त को सीने से लगाऊँ
हर लाश को बे-गोर-ओ-कफ़न देख रहा हूँ

अब बार है एहसास-ए-मसर्रत रग-ए-जाँ पर
देखे नहीं जो रंज-ओ-मेहन देख रहा हूँ

गाँधी का वो पैग़ाम-ए-मोहब्बत-व-उख़ुव्वत
उजड़ा हुआ गाँधी का चमन देख रहा हूँ