उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bata manzil-e-shauq kya ho gaya

बता मंज़िल-ए-शौक़ क्या हो गया

بتا منزل شوق کیا ہو گیا

शायर: Ehsan Jafri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बता मंज़िल-ए-शौक़ क्या हो गया
मिरी कोशिशों का सिला खो गया

हवादिस की आँधी है ज़ोरों पे आज
मिरा राहबर आज क्यों सो गया

न पंद-ओ-नसीहत न ज़ौक़-ए-अमल
ये शैख़-ओ-बरहमन को क्या हो गया

चमन से गुज़रती है मुँह फेर कर
सबा की अदाओं को क्या हो गया

तिरी दिल-नवाज़ी की क्या देगा दाद
पलट कर वो आया नहीं जो गया