उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere dar se uThe gham uThate rahe

तेरे दर से उठे ग़म उठाते रहे

تیرے در سے اٹھے غم اٹھاتے رہے

शायर: Ehsan Jafri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे दर से उठे ग़म उठाते रहे
बज़्म-ए-ख़्वाब-ए-मोहब्बत सजाते रहे

चलते चलते मिले कितने दश्त-ए-जुनूँ
गीत उल्फ़त के हम तो सुनाते रहे

ख़ुद तो जेहद-ओ-अमल से गुरेज़ाँ रहे
नक़्श-ए-क़िस्मत मगर वो बताते रहे

यूँ तो तारीक थी अपनी राह-ए-सफ़र
ख़ून-ए-दिल से दिये हम जलाते रहे

रेगज़ारों में हुस्न-ए-वफ़ा का सिला
यार यारों से नज़रें चुराते रहे