उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi ki bahaar ho jao

ज़िंदगी की बहार हो जाओ

زندگی کی بہار ہو جاؤ

शायर: SabeenSaif11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी की बहार हो जाओ
तुम मिरा ए'तिबार हो जाओ

मैं तुम्हें सोचती रहूँ पल-पल
तुम मिरा इंतिज़ार हो जाओ

प्यार में बेबसी नहीं चलती
साहिब-ए-इख़्तियार हो जाओ

मुझ को अपना शिकार कर लो तुम
वर्ना मेरा शिकार हो जाओ

जान लोगे मिरी मोहब्बत को
दुश्मनों में शुमार हो जाओ

तीर बन जाओ तुम मोहब्बत में
फिर कलेजे के पार हो जाओ

कह रही हूँ तुम्हें शराफ़त से
बस मिरे एक बार हो जाओ

फूल कब तुम से चाहती हूँ मैं
मेरे रस्ते के ख़ार हो जाओ

तुम से मिल कर क़रार आ जाए
इस तरह बे-क़रार हो जाओ

मिरी आँखों को देखने वालो
आज दरिया के पार हो जाओ

एक दिन बस यूँही 'सबीन' कभी
उस के होंटों का प्यार हो जाओ