उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aap danista jo katra ke guzar jate hain

आप दानिस्ता जो कतरा के गुज़र जाते हैं

آپ دانستہ جو کترا کے گزر جاتے ہیں

शायर: SabeenSaif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आप दानिस्ता जो कतरा के गुज़र जाते हैं
मेरे एहसास में सौ दर्द उतर जाते हैं

पास आ कर भी अगर पास न आए कोई
हम शब-ए-वस्ल की तन्हाई में मर जाते हैं

क्या अजब दौर-ए-पुर-आशोब है जिस में ऐ दोस्त
लोग दस्तार बचाते हैं तो सर जाते हैं

जब पसीने का ख़रीदार न हो तब मज़दूर
शाम को नज़रें झुकाए हुए घर जाते हैं

ज़ख़्मी लफ़्ज़ों पे भी हँस हँस के अगर दाद मिले
हम से शाइ'र तो उसी वक़्त ही मर जाते हैं

अपने महबूब से मिलने के लिए रोज़ 'सबीन'
तुम को मा'लूम है हम चाँद-नगर जाते हैं