उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hijraton ke gulab dekhe hain

हिजरतों के गुलाब देखे हैं

ہجرتوں کے گلاب دیکھے ہیں

शायर: SabeenSaif7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हिजरतों के गुलाब देखे हैं
हम ने सारे 'अज़ाब देखे हैं

हम से पूछो कि दुख की मौज है क्या
हम ने पैहम हुबाब देखे हैं

अपनी नाकामियों पे रोते हो
हम से ख़ाना-ख़राब देखे हैं

इक समुंदर की प्यास थी मुझ में
और मैं ने सराब देखे हैं

मेरे हाथों की इन लकीरों में
जिस ने देखे 'अज़ाब देखे हैं

ख़ुद को देखा है ग़ौर से हम ने
लोग कम ही ख़राब देखे हैं

हम फ़क़ीरों से पूछते क्या हो
हम ने 'आली जनाब देखे हैं