उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi jate jate ye kya kah gai

ज़िंदगी जाते जाते ये क्या कह गई

زندگی جاتے جاتے یہ کیا کہہ گئی

शायर: Om Prakash Laghar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी जाते जाते ये क्या कह गई
मौत कुछ फ़ासले पर खड़ी रह गई

कोई भी सख़्त-जाँ तुझ सा देखा नहीं
जाते जाते मुझे हर बला कह गई

जो ज़बाँ ने कही वो अधूरी रही
बात पूरी मिरी ख़ामुशी कह गई

मुस्कुराए इधर वो मिरे हाल पर
अश्क बन कर उधर आरज़ू बह गई

कूच सू-ए-अदम हर मकीं कर गया
और हवेली खड़ी की खड़ी रह गई

जो भी ख़ूबी थी 'लाग़र' तिरी ज़ात में
तंग-दस्ती के सैलाब में बह गई