उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil sanbhalte sanbhalte sanbhal jaega

दिल सँभलते सँभलते सँभल जाएगा

دل سنبھلتے سنبھلتے سنبھل جائے گا

शायर: Om Prakash Laghar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल सँभलते सँभलते सँभल जाएगा
ग़म मसर्रत के साँचे में ढल जाएगा

आने वाले दिनों पर भरोसा करो
हर अंधेरा सहर में बदल जाएगा

हाकिम-ए-वक़्त डर आह-ए-नादार से
उस की गर्मी से वर्ना तू जल जाएगा

रास्ता पुर-ख़तर है सँभल कर चलो
पाँव वर्ना तुम्हारा फिसल जाएगा

मर्ग-ए-दुश्मन पे कैसी ख़ुशी दोस्तो
दम हमारा भी इक दिन निकल जाएगा

कोई ग़ुंचा न तोड़ो किसी शाख़ से
बाग़बाँ का कलेजा दहल जाएगा

फ़िक्र 'लाग़र' की बे-सूद है दोस्तो
उस का ग़म शेर-ओ-नग़्मा में ढल जाएगा