उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi bhar dauDta hai baiTh ja

ज़िंदगी भर दौड़ता है बैठ जा

زندگی بھر دوڑتا ہے بیٹھ جا

शायर: Faizan Asad9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी भर दौड़ता है बैठ जा
ग़म कहाँ कब बोलता है बैठ जा

पहली बारिश देख कर बरसात की
जाने क्या तू सोचता है बैठ जा

इस क़दर ले कर चला बार-ए-हयात
रास्ता ही बोलता है बैठ जा

पावँ खींचा है तिरा अहबाब ने
क्यों सहारा ढूँढता है बैठ जा

तश्त में लाशें सजी हैं ख़ून है
ये सियासी नाश्ता है बैठ जा

झूट की दुनिया में सब उलझे हैं तू
बात सच्ची बोलता है बैठ जा

इक दिए ने जल के तूफ़ाँ से कहा
मुझ से डर कर काँपता है बैठ जा

नन्हे बच्चे को तिलावत से न रोक
कान में रस घोलता है बैठ जा

देख 'असअद' अजनबी इक शख़्स से
रिश्ता-ए-जाँ जोड़ता है बैठ जा