उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dar-ba-dar mazdur ki taqdir soch

दर-ब-दर मज़दूर की तक़दीर सोच

در بدر مزدور کی تقدیر سوچ

शायर: Faizan Asad10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर-ब-दर मज़दूर की तक़दीर सोच
मर गया है क्यों भला रहगीर सोच

आलम-ए-पज़मुर्दगी के दरमियाँ
हौसलों से पुर कोई तहरीर सोच

आ के मक़्तल में तज़ब्ज़ुब किस लिए
ख़्वाब देखा है तो फिर ता'बीर सोच

इक मकान-ए-मुख़्तसर से ख़ुश न हो
ये ज़मीं हो किस तरह तस्ख़ीर सोच

ज़ुल्म सहना ज़ुल्म की ताईद है
कैसे टूटे ज़ुल्म की ज़ंजीर सोच

बे-सबब तख़रीब-ए-गुलशन रोक दे
फूल हो जाएँ अगर शमशीर सोच

तू निगाहों से चुराता है सुकूँ
ये ख़ता है लाइक़-ए-ताज़ीर सोच

लाश बच्चे की लिए साकित है वो
क्यों न रोया साहिब-ए-तस्वीर सोच

सब तो अपने थे अदू कोई न था
कर दिया पैवस्त किस ने तीर सोच

शिकवा-ए-इफ़्लास 'असअद' छोड़ कर
क्यों बिकी अज्दाद की जागीर सोच