उर्दू शायरी · ग़ज़ल

allah bashar jah-o-hasham bech rahe hain

अल्लाह बशर जाह-ओ-हशम बेच रहे हैं

اللہ بشر جاہ و حشم بیچ رہے ہیں

शायर: Faizan Asad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अल्लाह बशर जाह-ओ-हशम बेच रहे हैं
ख़ुद-साख़्ता पत्थर के सनम बेच रहे हैं

मग़रिब की तअ'फ़्फ़ुन-ज़दा तहज़ीब के बदले
हम अर्ज़-ए-मुक़द्दस का हरम बेच रहे हैं

बेबाक सदाक़त से जो मंसूब रहा है
दिल रोता है क्यों लोग क़लम बेच रहे हैं

हैरान हूँ मैं सख़्ती-ए-जाँ देख के उन की
किस दिल से वो रूदाद-ए-सितम बेच रहे हैं

पेशा है किसी का तो कोई भूक से मजबूर
बाज़ार-ए-अदालत में क़सम बेच रहे हैं

हिजरत हुई अज़हान पे कुछ ऐसे मुसल्लत
वो घर था जो इक बाग़-ए-इरम बेच रहे हैं

'असअद' यहाँ मज़हब है मुनाफ़ा' की तिजारत
हर मोड़ पे अब लोग धरम बेच रहे हैं