उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaise ji paunga juda ho kar

कैसे जी पाऊँगा जुदा हो कर

کیسے جی پاؤں گا جدا ہو کر

शायर: Faizan Asad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कैसे जी पाऊँगा जुदा हो कर
जा रहा है कोई ख़फ़ा हो कर

ढूँढता फिर रहा है मुझ सा तू
क्या मिला तुझ को बेवफ़ा हो कर

भटके लोगों को मिल गई मंज़िल
मैं बिछा जब से रास्ता हो कर

घिर गया याद से बिछड़ते ही
क़ैद में हो गया रिहा हो कर

पत्थरों पर ये क्या असर करती
लौट आई मिरी सदा हो कर

साया-ए-दीं का ये सिला देखो
मिल गया है सुकूँ फ़ना हो कर

हम-सफ़र जब से तू हुआ 'असअद'
इश्क़ उभरा है ख़ुश-नुमा हो कर