उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zara sa aadmi hun

ज़रा सा आदमी हूँ

ذرا سا آدمی ہوں

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi12 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़रा सा आदमी हूँ
बला का आदमी हूँ

कहा न आदमी हूँ
सुना क्या आदमी हूँ

कहाँ का आदमी हूँ
मैं दिखता आदमी हूँ

तिरे ही फ़ज़्ल से मैं
ख़ुदाया आदमी हूँ

न ज़िंदा हूँ न मुर्दा
डरा सा आदमी हूँ

ख़ुदा वाले तो तुम हो
मैं सीधा आदमी हूँ

निहायत कम हूँ इंसाँ
ज़ियादा आदमी हूँ

ज़बाँ किरदार कुछ है
मैं कैसा आदमी हूँ

ये दो ही सूरतें हैं
ख़ुदा या आदमी हूँ

कभी मिल कर तो देखो
मैं अच्छा आदमी हूँ

मगर बा-होश मिलना
मैं ज़िंदा आदमी हूँ

सिवाए सब्र 'आसी'
करूँ क्या आदमी हूँ