उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bhala chahega koi kya kisi ka

भला चाहेगा कोई क्या किसी का

بھلا چاہے گا کوئی کیا کسی کا

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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भला चाहेगा कोई क्या किसी का
हो दुश्मन आदमी जब आदमी का

जफ़ा-कारी है ज़िंदा आप ही से
जफ़ा-कारी है शेवा अप ही का

मिरा शेवा है इख़्लास-ओ-मोहब्बत
बुरा चाहूँगा मैं क्यों कर किसी का

ख़ुदा का शुक्र है उस बेवफ़ा ने
सबब पूछा है मेरी ख़ामुशी का

तिरे दिल में भी हो दर्द-ए-मोहब्बत
तिरा दिल काश हो जाए किसी का

दिलों में हसरत-ए-तख़रीब पिन्हाँ
लबों पे ज़िक्र सुल्ह-ओ-आश्ती का

यही मेराज है ख़ुद-आगही की
न तोड़ो दिल ज़माने में किसी का

वही दुश्मन हुए हैं आज 'आसी'
जो दम भरते थे कल तक दोस्ती का