उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zamin ko bhi KHala se misal di jae

ज़मीन को भी ख़ला से मिसाल दी जाए

زمین کو بھی خلا سے مثال دی جائے

शायर: Badr Muneer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़मीन को भी ख़ला से मिसाल दी जाए
जो ज़िंदगी से मोहब्बत निकाल दी जाए

निकल ही आएगा हर मसअले का हल ख़ुद ही
जो दरमियान से हुज्जत निकाल दी जाए

फिर उस के बा'द तो मश्क़-ए-सुख़न अकारत है
अगर ख़याल से जिद्दत निकाल दी जाए

मिरी नज़र में है वो शख़्स रहम के क़ाबिल
कि जिस के माल से बरकत निकाल दी जाए

क़ुबूल है ये तमन्नाओं का हुजूम मुझे
मगर ये वस्ल की हसरत निकाल दी जाए

'मुनीर' ख़ल्क़-ए-ख़ुदा को मिले सुकून का साँस
मिरे वतन से सियासत निकाल दी जाए