उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zalzalon ka asar nahin hota

ज़लज़लों का असर नहीं होता

زلزلوں کا اثر نہیں ہوتا

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़लज़लों का असर नहीं होता
घर इधर से उधर नहीं होता

सिर्फ़ शो'लों की दाद मिलती है
क्या सुलगना हुनर नहीं होता

रेल गाड़ी से कूद जाऊँ क्या
अब अकेले सफ़र नहीं होता

'इश्क़ उस फ़ैसले को कहते हैं
जो कभी सोच कर नहीं होता

क़ब्र में रोज़-ए-हश्र से पहले
ज़िंदा होने का डर नहीं होता

सब करिश्मा है शे'र होने का
शे'र कहना हुनर नहीं होता

मैं ही ज़ख़्मों को छेड़ देता हूँ
जब कोई चारागर नहीं होता

जिस के क़ब्ज़े में दुनिया होती है
उस का दुनिया में घर नहीं होता