उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaKHiri dad rakh ne di thi

आख़िरी दाद राख ने दी थी

آخری داد راکھ نے دی تھی

शायर: Fahmi Badayuni5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आख़िरी दाद राख ने दी थी
मैं ने ग़ज़लों में आग दे दी थी

चाहे फूलों के भेस में ही सही
पहली आवाज़ आपने दी थी

वो नहीं जानता कि उस को भीख
मैं ने भी भीख माँग के दी थी

घर में दरवाज़ा भी नहीं था मिरे
उस ने दस्तक भी दूर से दी थी

आप तन्हा अगर नहीं थे तो
मेरी तन्हाई क्यों कुरेदी थी