उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aap agar mehrban nahin hote

आप अगर मेहरबाँ नहीं होते

آپ اگر مہرباں نہیں ہوتے

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आप अगर मेहरबाँ नहीं होते
हम जहाँ हैं वहाँ नहीं होते

चाहे जितने बुलंद हों बादल
ये कभी आसमाँ नहीं होते

जिन के बस में ज़बान रहती है
वो कभी बे-ज़बाँ नहीं होते

जो तमाशे पसंद हैं मुझ को
वो तमाशे यहाँ नहीं होते

दश्त की बात और है वर्ना
क़ैस लैला कहाँ नहीं होते

पेड़ फलदार कट गए जब से
बाग़ में बाग़बाँ नहीं होते

ध्यान रक्खें पुकारने वाले
हम जहाँ हैं वहाँ नहीं होते