उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aap dete nahin saza koi

आप देते नहीं सज़ा कोई

آپ دیتے نہیں سزا کوئی

शायर: Fahmi Badayuni6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आप देते नहीं सज़ा कोई
किस भरोसे करें ख़ता कोई

अब जो देखेंगे आइना कोई
पहले सोचेंगे चुटकुला कोई

मैं ने मस्जिद में जाना छोड़ दिया
रोज़ मिल जाता था ख़ुदा कोई

रो रहा हूँ मैं बच्चों की मानिंद
और बहला नहीं रहा कोई

छोड़ कर जा रहा हूँ घर लेकिन
मुझ को समझा नहीं रहा कोई

मर गए सब ख़िरद के हमले में
दिल में वहशी नहीं बचा कोई