उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zaKHm-e-hijran ki mudawat se pahle pahle

ज़ख्म-ए-हिज्राँ की मुदावात से पहले पहले

زخم ہجراں کی مداوات سے پہلے پہلے

शायर: Faizan Asad8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़ख्म-ए-हिज्राँ की मुदावात से पहले पहले
दर्द रक़्साँ है मुलाक़ात से पहले पहले

क़ैद-ए-ज़िंदाँ हो या हो फ़ैसला सरकूबी का
लाज़िमा सोचिए हक़ बात से पहले पहले

काश वो आज पलट आए किसी भी सूरत
चाँदनी रात की बरसात से पहले पहले

राह से भटकी नई नस्ल बचानी है हमें
मुमकिना आमद-ए-आफ़ात से पहले पहले

कैसे महफ़ूज़ रखा जाएगा तूफ़ाँ में शजर
कोई तदबीर हो समरात से पहले पहले

सोचिए क़ौम को भरपाई न करनी पड़ जाए
वक़्त बे-वक़्त के जज़्बात से पहले पहले

दर नहीं लाज़मी बुनियाद की मज़बूती है
आने वाले बुरे हालात से पहले पहले

लोग ख़ुश हों कि न हों रब तो हो राज़ी 'असअद'
ज़ीस्त के आख़री लम्हात से पहले पहले