उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zahiri aankh se pinhan tum ho

ज़ाहिरी आँख से पिन्हाँ तुम हो

ظاہری آنکھ سے پنہاں تم ہو

शायर: Zaheen Shah Taji7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़ाहिरी आँख से पिन्हाँ तुम हो
दीदा-ए-दिल से नुमायाँ तुम हो

ग़ुन्चा-ओ-लाला-ओ-रैहाँ तुम हो
ये गुलिस्ताँ का गुलिस्ताँ तुम हो

हर तसव्वुर से नुमायाँ हो कर
हर तसव्वुर से गुरेज़ाँ तुम हो

देख कर जिस को ख़ुदा याद आए
ब-ख़ुदा तुम हो वो इंसाँ तुम हो

खो गए एक तजल्ली में कलीम
बर्क़-ए-सद-तूर-बदामाँ तुम हो

क़िस्मत-ए-जल्वा-ए-हैरां मैं हूँ
क़िस्मत-ए-दीदा-ए-हैराँ तुम हो

दिल तुम्हारा है कि तुम हो दिल के
मेज़बाँ तुम हो कि मेहमाँ तुम हो