उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yunhi koi mil gaya tha sar-e-rah chalte chalte

यूँही कोई मिल गया था सर-ए-राह चलते चलते

یوں ہی کوئی مل گیا تھا سر راہ چلتے چلتے

शायर: Kaifi Azmi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँही कोई मिल गया था सर-ए-राह चलते चलते
वहीं थम के रह गई है मिरी रात ढलते ढलते

जो कही गई न मुझ से वो ज़माना कह रहा है
कि फ़साना बन गई है मिरी बात टलते टलते

शब-ए-इंतिज़ार आख़िर कभी होगी मुख़्तसर भी
ये चराग़ बुझ रहे हैं मिरे साथ जलते जलते