उर्दू शायरी · ग़ज़ल

itna to zindagi mein kisi ke KHalal paDe

इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े

اتنا تو زندگی میں کسی کے خلل پڑے

शायर: Kaifi Azmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े

जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े

इक तुम कि तुम को फ़िक्र-ए-नशेब-ओ-फ़राज़ है
इक हम कि चल पड़े तो बहर-हाल चल पड़े

साक़ी सभी को है ग़म-ए-तिश्ना-लबी मगर
मय है उसी की नाम पे जिस के उबल पड़े

मुद्दत के बा'द उस ने जो की लुत्फ़ की निगाह
जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़े