उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun to hone ko kya nahin hota

यूँ तो होने को क्या नहीं होता

یوں تو ہونے کو کیا نہیں ہوتا

शायर: A.R. Sahil 'Aleeg'6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ तो होने को क्या नहीं होता
आदमी बस ख़ुदा नहीं होता

दर्द दिल टूटने का जान-ए-मन
या तो होता है या नहीं होता

फ़ाएलातुन फ़इलुतन फ़ेलुन
इस से मिसरा रवा नहीं होता

पीने पड़ते हैं सैंकड़ों आँसू
दर्द ख़ुद तो दवा नहीं होता

जो भी इंसाँ है यार इंसाँ है
कोई छोटा बड़ा नहीं होता

वैसे रिश्ते बहुत से हैं 'साहिल'
दर्द सा इक सगा नहीं होता