उर्दू शायरी · ग़ज़ल

husn-dar-husn phir aazmane ke baad

हुस्न-दर-हुस्न फिर आज़माने के बा'द

حسن در حسن پھر آزمانے کے بعد

शायर: A.R. Sahil 'Aleeg'6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हुस्न-दर-हुस्न फिर आज़माने के बा'द
ख़ून रोना पड़ा दिल लगाने के बा'द

उन रक़ीबों में फ़ोटो खिंचाने के बा'द
क्या मिलेगा तुम्हें जी जलाने के बा'द

इस क़दर मुझ पे मरती है पगली कोई
रोने लगती है डी पी हटाने के बा'द

वो पतंग थी कटी और चली भी गई
हाथ धागा बचा बस उड़ाने के बा'द

'इश्क़ तो दूरियों में भी मिटता नहीं
रूठती है हवस दूर जाने के बा'द

लग के बहती थी 'साहिल' से कल जो नदी
कट गई मुझ से सागर में जाने के बा'द