उर्दू शायरी · ग़ज़ल

siyasi nafraton ki zad mein aaenge hamin kab tak

सियासी नफ़रतों की ज़द में आएँगे हमीं कब तक

سیاسی نفرتوں کی زد میں آئیں گے ہمیں کب تک

शायर: A.R. Sahil 'Aleeg'6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सियासी नफ़रतों की ज़द में आएँगे हमीं कब तक
भिगो कर शाह रक्खेगा लहू में आस्तीं कब तक

कई कंकर वफ़ा की झील में मैं फेंक आया हूँ
उभर कर सत्ह पे आएँगे देखें तह-नशीं कब तक

भरम के पाँव की ज़ंजीर को सच तोड़ ही देगा
किसी के झूट पर कोई करेगा भी यक़ीं कब तक

रखेगा वक़्त उन के रू-ब-रू भी आइना इक दिन
जहाँ के ऐब ही देखा करेंगे नुक्ता-चीं कब तक

निगाहों से ही वो हर शख़्स को काफ़िर बना देगा
बचेगी ये हवस के साए से रू-ए-ज़मीं कब तक

न जाने कब रिहा इस क़ैद से हम होंगे ऐ 'साहिल'
सताएँगे हमारी ज़ीस्त को ये कुफ़्र-ओ-दीं कब तक