उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun tarannum-rez hai har parda dil ke saz ka

यूँ तरन्नुम-रेज़ है हर पर्दा दिल के साज़ का

یوں ترنم ریز ہے ہر پردہ دل کے ساز کا

शायर: Vahshi Kanpuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ तरन्नुम-रेज़ है हर पर्दा दिल के साज़ का
हर-नफ़स पर मुझ को धोका है तिरी आवाज़ का

इक तजल्ली ही तजल्ली हर तरफ़ पाता हूँ मैं
अल्लह-अल्लह क्या असर है हुस्न के ए'जाज़ का

इज़्तिराब-ए-दिल के सदमे सोज़-ए-पिन्हाँ के निसार
आ गया जुम्बिश में हर पर्दा हरीम-ए-नाज़ का

चश्म-ए-हैरत मुहर-बर-लब दिल ब-आग़ोश-ए-हबीब
मुख़्तसर ये हाल है अब आश्ना-ए-राज़ का

हश्र सब को सरमद-ओ-मंसूर का मालूम है
कौन हामिल हो सकेगा अब नवा-ए-राज़ का