उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun jawani aai ruKHsat ho gai

यूँ जवानी आई रुख़्सत हो गई

یوں جوانی آئی رخصت ہو گئی

शायर: Sabir Aarwi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ जवानी आई रुख़्सत हो गई
आइना देखा तो हैरत हो गई

बढ़ गई कुछ और तौक़ीर-ए-जुनूँ
अपना घर देखा तो वहशत हो गई

छुप छुपाते फिर रहे थे आज तक
आज तश्त-अज़-बाम ग़ुर्बत हो गई

जुस्तुजू के पाँव थक कर रह गए
दूरी-ए-मंज़िल क़यामत हो गई

आप के आने से बस इतना हुआ
कुछ तो तस्कीन-ए-तबीअत हो गई

आए बैठे और उठ कर चल दिए
किस क़दर जल्दी क़यामत हो गई