उर्दू शायरी · ग़ज़ल

karobar-e-zindagi se jis ka dil ghabraega

कारोबार-ए-ज़िंदगी से जिस का दिल घबराएगा

کاروبار زندگی سے جس کا دل گھبرائے گا

शायर: Sabir Aarwi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कारोबार-ए-ज़िंदगी से जिस का दिल घबराएगा
यार की ज़ुल्फ़-ए-रसा के साए में आ जाएगा

तज़्किरा रुख़्सार का या ज़िक्र-ए-ज़ुल्फ़-ए-यार हो
कैफ़ आँखों में यक़ीनन कुछ न कुछ छा जाएगा

जो मनाज़िर आज तक तुम ने कभी देखे नहीं
कोई तुम को वो मनाज़िर एक दिन दिखलाएगा

अब करम-फ़रमाइयाँ हों या इताब-ए-नाज़ हो
आप के दस्त-ए-करम से दिल सिला कुछ पाएगा

वक़्त की उलझी हुई ज़ुल्फ़ें सँवारें किस तरह
अहल-ए-दिल को ये सलीक़ा ख़ुद-बख़ुद आ जाएगा

आप पहले हँस के ग़म खाते रहे 'साबिर' मगर
अब यही ग़म रफ़्ता रफ़्ता आप को खा जाएगा