उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya kya na dil pe dagh uThae hue hain hum

क्या क्या न दिल पे दाग़ उठाए हुए हैं हम

کیا کیا نہ دل پہ داغ اٹھائے ہوئے ہیں ہم

शायर: Sabir Aarwi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या क्या न दिल पे दाग़ उठाए हुए हैं हम
इक घर में सौ चराग़ जलाए हुए हैं हम

अब इस चमन से और हो उम्मीद क्या हमें
ऐ सुब्ह-ए-नौ फ़रेब तो खाए हुए हैं हम

उन की निगाह-ओ-अबरू-ओ-रुख़्सार का ख़याल
कुछ सोच कर गले से लगाए हुए हैं हम

तस्वीर रू-ए-यार के हुस्न-ओ-सिफ़ात की
इस दिल के आइने में बसाए हुए हैं हम

ऐ दोस्त आ के देख ले मेहमाँ-नवाज़ीयाँ
इक ख़ाना-ए-उमीद सजाए हुए हैं हम

इस ख़ौफ़ से कि दिल का जनाज़ा निकल न जाए
अपने ग़म-ओ-अलम को छुपाए हुए हैं हम

शायद गुज़र सबा का कभी इस तरफ़ से हो
इक रहगुज़र पे फूल बिछाए हुए हैं हम

अब वो बिठाएँ दिल में कि दिल से निकाल दें
'साबिर' किसी की बज़्म में आए हुए हैं हम