उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun gham baiThe hain sirhane hamare

यूँ ग़म बैठे हैं सिरहाने हमारे

یوں غم بیٹھے ہیں سرہانے ہمارے

शायर: Deepak Ghazipuri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ ग़म बैठे हैं सिरहाने हमारे
कि जैसे दोस्त हैं सच्चे हमारे

हमारी राह हम से पूछती है
हुए क्यों गुम-शुदा सपने हमारे

मिलेगी मंज़िल-ए-मक़्सूद इक दिन
हैं कहते पाँव के छाले हमारे

अभी ख़ामोश रहना लाज़मी है
अभी गर्दिश में हैं तारे हमारे

तुम्हारी याद में रोएँगी आँखें
तुम्हें ढूँढेंगे आईने हमारे

हमें तब ग़ैर भी अपना कहेंगे
कि दिन आएँगे जब अच्छे हमारे

विरासत में मिली दौलत सभी को
हैं ज़िम्मेदारियाँ हिस्से हमारे

हमें ही आँख अब दिखला रहे हैं
कि ये शतरंज के प्यादे हमारे