उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yahi hai unki tamanna to kar ke dekhte hain

यही है उन की तमन्ना तो कर के देखते हैं

یہی ہے ان کی تمنا تو کر کے دیکھتے ہیں

शायर: Deepak Ghazipuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यही है उन की तमन्ना तो कर के देखते हैं
फ़ज़ा में ख़ुशबू के जैसे बिखर के देखते हैं

महाज़-ए-जंग में इक दिन उतर के देखते हैं
नहीं विसाल मयस्सर तो मर के देखते हैं

ये देखते हैं हमें जो ठहर के देखते हैं
हमारे वास्ते क्या कर गुज़र के देखते हैं

कि उन के दिल में है धोका नज़र फ़रेबी है
ये झूट है कि हमें आँख भर के देखते हैं

चराग़ फिर से जलाते हैं यार उल्फ़त के
कि नफ़रतों के चलो पर कतर के देखते हैं

कि तितलियों से ही कुछ रंग उधार लेते हैं
चलो न ख़्वाब में कुछ रंग भर के देखते हैं