उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rafta-rafta pighal raha hun main

रफ़्ता-रफ़्ता पिघल रहा हूँ मैं

رفتہ رفتہ پگھل رہا ہوں میں

शायर: Deepak Ghazipuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रफ़्ता-रफ़्ता पिघल रहा हूँ मैं
एक 'अर्से से जल रहा हूँ मैं

सो गई नींद हार कर मुझ से
अब भी करवट बदल रहा हूँ मैं

हाए क़िस्मत से ठोकरें खा कर
गिर रहा हूँ सँभल रहा हूँ मैं

ख़ुद की अर्थी उठा के काँधे पर
ख़ैर तन्हा ही चल रहा हूँ मैं

आज बिखरा हुआ हूँ लफ़्ज़ों में
कल मुसलसल ग़ज़ल रहा हूँ मैं