उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye ujDe bagh virane purane

ये उजड़े बाग़ वीराने पुराने

یہ اجڑے باغ ویرانے پرانے

शायर: Habib Jalib5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये उजड़े बाग़ वीराने पुराने
सुनाते हैं कुछ अफ़्साने पुराने

इक आह-ए-सर्द बन कर रह गए हैं
वो बीते दिन वो याराने पुराने

जुनूँ का एक ही आलम हो क्यूँ कर
नई है शम्अ' परवाने पुराने

नई मंज़िल की दुश्वारी मुसल्लम
मगर हम भी हैं दीवाने पुराने

मिलेगा प्यार ग़ैरों ही में 'जालिब'
कि अपने तो हैं बेगाने पुराने