उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye shahr aafaton se to Khaali koi na tha

ये शहर आफ़तों से तो ख़ाली कोई न था

یہ شہر آفتوں سے تو خالی کوئی نہ تھا

शायर: Tabish Kamal4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये शहर आफ़तों से तो ख़ाली कोई न था
जब हम सख़ी हुए तो सवाली कोई न था

उस दश्त में मिरा ही हयूला था हर तरफ़
मैं ने ही शम'-ए-'इश्क़ जला ली कोई न था

जलसे उजड़ गए थे किसी ख़ुद-फ़रेब के
ख़ुद ही बजा रहा था वो ताली कोई न था

'ताबिश' हर एक दिल में शरारे थे क़हर के
हो पास जिस के सोज़-ए-बिलाली कोई न था