उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ajab yaqin sa us shaKHs ke guman mein tha

अजब यक़ीन सा उस शख़्स के गुमान में था

عجب یقین سا اس شخص کے گمان میں تھا

शायर: Tabish Kamal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अजब यक़ीन सा उस शख़्स के गुमान में था
वो बात करते हुए भी नई उड़ान में था

हवा भरी हुई फिरती थी अब के साहिल पर
कुछ ऐसा हौसला कश्ती के बादबान में था

हमारे भीगे हुए पर नहीं खुले वर्ना
हमें बुलाता सितारा तो आसमान में था

उतर गया है रग-ओ-पय में ज़ाइक़ा उस का
अजीब शहद सा कल रात उस ज़बान में था

खुली जो आँख तो 'ताबिश' कमाल ये देखा
वो मेरी रूह में था और मैं मकान में था