उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye shab unhin zulfon ki karamat lage hai

ये शब उन्हीं ज़ुल्फ़ों की करामात लगे है

یہ شب انہیں زلفوں کی کرامات لگے ہے

शायर: Kaleem Aajiz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये शब उन्हीं ज़ुल्फ़ों की करामात लगे है
सुनते थे ग़ज़ल में ये वही रात लगे है

पत्थर की तरह तेरी हर इक बात लगे है
दिल तोड़ के नासेह तुझे क्या हात लगे है

जीना ही मोहब्बत में करामात लगे है
जी ले है जो मरना तो उसे बात लगे है

हम ने जो दिया है वो हमें जान रहे हैं
सरमाया-ए-ग़म मुफ़्त कहाँ हात लगे है

आराम कहाँ अहल-ए-वफ़ा को किसी करवट
इक आग है सीने में जो दिन-रात लगे है

औरों से मोहब्बत भी त'अल्लुक़ भी वफ़ा भी
हम से तो कभी की न मुलाक़ात लगे है