उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bayan jab kalim apni haalat kare hai

बयाँ जब 'कलीम' अपनी हालत करे है

بیاں جب کلیمؔ اپنی حالت کرے ہے

शायर: Kaleem Aajiz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बयाँ जब 'कलीम' अपनी हालत करे है
ग़ज़ल क्या पढ़े है क़यामत करे है

भला आदमी था प नादान निकला
सुना है किसी से मोहब्बत करे है

कभी शा'इरी इस को करनी न आती
उसी बेवफ़ा की बदौलत करे है

छुरी पर छुरी खाए जाए है कब से
और अब तक जिए है करामत करे है

करे है 'अदावत भी वो इस अदा से
लगे है कि जैसे मोहब्बत करे है

ये फ़ित्ने जो हर इक तरफ़ उठ रहे हैं
वही बैठा बैठा शरारत करे है

क़बा एक दिन चाक उस की भी होगी
जुनूँ कब किसी की रि'आयत करे है