उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye sans bharti hui zindagi ka dukh hai mujhe

ये साँस भरती हुई ज़िंदगी का दुख है मुझे

یہ سانس بھرتی ہوئی زندگی کا دکھ ہے مجھے

शायर: Qamar Abbas Qamar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये साँस भरती हुई ज़िंदगी का दुख है मुझे
तुम्हारा इस का और उस का सभी का दुख है मुझे

सिमट गईं किसी जंगल की वहशतें मुझ में
सो घर में होते हुए बे-घरी का दुख है मुझे

बहुत ज़ियादा अँधेरों से भी शिकायत थी
और इन दिनों तो बहुत रौशनी का दुख है मुझे

मैं रो पड़ूँगा बहुत भींच के गले न लगा
मैं पहले जैसा नहीं हूँ किसी का दुख है मुझे

ये कोई शे'र नहीं हैं ये ज़ख़्म हैं मेरे
तबीब बोलता है शा'इरी का दुख है मुझे

बिछड़ के तुझ से मैं इंसानियत से गिर गया हूँ
तू ख़ुश हुआ है तो तेरी ख़ुशी का दुख है मुझे